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अभिषेक/ पूजन

मंगलभात पूजन

मंगल दोष का निवारण भात पूजन के द्वारा एकमात्र अवंतिका (उज्जैन) में ही संपन्न कराया जाता है। यहां विधिवत पूजन कराने से मंगल ग्रह के दुष्प्रभाव में कमी आती है, तथा शुभ फलों में वृद्धि होती है। यही नहीं भगवान का कुमकुम और गुलाब या लाल पुष्पों से अभिषेक भी किया जाता है।

मंगल को भात इसलिए चढ़ाए जाते हैं क्योंकि भात यानी चावल की प्रकृति ठंडी होती है । इससे मंगल को शांति मिलती है और वह भात पूजन करने वाले पर कृपा करते हैं। ठंडक मिलने से मंगल के दुष्प्रभाव स्वतः कम होते हैं।

मंगल दोष की शांति के लिए भात पूजा विवाह के पूर्व करने की सलाह मांगलिक कुंडली वालों को दी जाती है। भात(चावल) से शिवलिंगरूपी मंगलदेव की पूजा की जाती है। इस पूजा में सर्वप्रथम गणेशजी और माता पार्वतीजी का पूजन होता है। फिर नवग्रह पूजन, कलश पूजन एवं शिवलिंग रूप भगवान का पंचामृत पूजन एवं अभिषेक वैदिक मंत्रोचार द्वारा किया जाता है। इसके बाद भगवान को भात अर्पित कर उनका पूजन एवं मंगल जाप किया जाता है।