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अभिषेक/ पूजन
नवग्रह शांति/जाप
नवग्रह शांति जाप नवग्रहों की शांति के लिए किया जाता है। नवग्रहों की प्रभावी दशाएं और दोषों के निवारण के लिए यह जाप महत्वपूर्ण माना जाता है।
नवग्रह शांति जाप का मुख्य उद्देश्य नवग्रहों के शुभाशुभ प्रभाव को शांत करना होता है और व्यक्ति को संतुलन, समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति प्रदान करना है। यह जाप नवग्रहों की दशा और गोचरों को सुखद बनाने और अशुभता को दूर करने का साधन होता है।
नवग्रह शांति जाप में नवग्रहों के बीज मंत्रों का जाप किया जाता है। हर ग्रह का अपना बीज मंत्र होता है जिसे जप करने से हमारे जीवन पर उस ग्रह का दुष्प्रभाव कम होता है।
नवग्रह शांति जाप को प्रमुखतः ग्रहों के दशाओं, ग्रहों की स्थिति या कुंडली में किसी दोष के समय किया जाता है। इसे विशेषज्ञ ब्राह्मण या पंडित द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए ताकि सही मंत्रों का जाप किया जा सके।
निम्नलिखित हैं नवग्रहों के लिए प्रयोग किए जाने वाले शांति मंत्र:
- सूर्य ग्रह (Surya Graha) – ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥
- चंद्रमा ग्रह (Chandra Graha) – ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः॥
- मंगल ग्रह (Mangal Graha) – ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः॥
- बुध ग्रह (Budh Graha) – ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः॥
- गुरु ग्रह (Guru Graha) – ॐ ज्रां ज्रीं ज्रौं सः गुरवे नमः॥
- शुक्र ग्रह (Shukra Graha) – ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः॥
- शनि ग्रह (Shani Graha) – ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥
- राहू ग्रह (Rahu Graha) – ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः॥
- केतु ग्रह (Ketu Graha) – ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः॥
ये मंत्र नवग्रहों के दोषों को दूर करने और उनकी शान्ति के लिए जाप किए जाते हैं। जाप के लिए व्यक्ति को स्वच्छ मन, शुद्ध वाक्, और नियमितता के साथ ये मंत्रों का जाप करना चाहिए। इससे नवग्रहों के सकारात्मक असर बढ़ते हैं और समस्याएं कम होती हैं।